मैं बेटा नहीं, बेटी हूं

मैं भी लेती साँस हूँ,

पत्थर नहीं इंसान हूँ,

कोमल मन है मेरा,

वही भोला सा चेहरा मेरा,

जजबातों में जीती हूँ,

बेटा नही बेटी हूँ,

कैसे दामन छुड़ा लिया,

जीवन के पहले ही मिटा दिया,

तुझे ही बनी हूं,

बस प्यार की भूखी हुँ,

जीवन पार लगा दूंगी अपना लो,

मैं बेटा भी बन जाऊँगी,

दिया नहीं कोई मौका बस पराया बनाकर सोचा,

एक बार गले से लगा लो लो,

फिर चाहे हर कदम आजमा लों,

हर लड़ाई जीत कर दिखाऊगी,

मैं अग्नि में जलकर भी जी जाऊगी,

चंद लोगो की सुन ली तुमने,

पर मेरी पुकार न सुनी तुमने,

मैं बोझ नही भविष्य हूं,

मैं बेटा नही, पर बेटी हुँ।

Kratika Waiker